Dusshera 2020 : एक ऐसा गांव जहां की जाती है रावण की पूजा, नहीं जलाते हैं पुतले

Dusshera 2020 : दशहरा के अवसर पर रावण के पुतलों का दहन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है लेकिन देश में एक जगह ऐसी भी है जहां राक्षसों के राजा रावण की पूजा लोग करते हैं. जी हां…आपने सही सुना राक्षसों के राजा रावण की पूजा की जाती है. आइए हम आपको उस जगह के बारे में बताते हैं.

महाराष्ट्र के अकोला जिले के एक गांव रावण के पूजा करने की प्रथा है. वहां के स्थानीय लोग बताते हैं कि पिछले 200 वर्षों से संगोला गांव में रावण की पूजा उसकी ‘विद्वता और तपस्वी गुणों’ के लिए लोग करते हैं. गांव के बीच में काले पत्थर की रावण की लंबी प्रतिमा नजर आती है जिसके 10 सिर और 20 हाथ हैं.

स्थानीय लोग यहीं राक्षसों के राजा की विधिवत पूजा करते हैं. बताया जाता है कि गांव के लोगों का विश्वास राम में भी है और रावण में भी है…वे रावण के पुतले नहीं जलाते हैं…रावण के कारण देश के कई हिस्सों से लोग दशहरा के मौके पर रावण की प्रतिमा को देखने यहां पहुंचते हैं और कुछ पूजा भी करते नजर आते हैं. हालांकि, इस साल कोरोना संक्रमण के कारण यहां भी पूरे देश की तरह सादे तरीके से उत्सव मनाने का काम किया जा रहा है.

क्यों करते हैं रावण की पूजा?
गांव के लोग रावण को बहुत बड़ा विद्वान मानते हैं. लोग बताते हैं कि उनके गांव में रावण की पूजा इसलिए की जाती है, क्योंकि वह बहुत बुद्धिमान था और उसमें तवस्वियों वाले गुण मौजूद थे. महान सम्राट रावण के कारण ही गांव में खुशहाली, शांति और संतोष है.

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