कोरोना तीन स्तर पर हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता, पढ़ें ये खास रिपोर्ट

भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या जल्द ही एक करोड के पार हो जाएगी. इसी बीच आपको अक्तूबर 2020 में ‘द लैसेंट’ में प्रकाशित रिपोर्ट के बारे में बताते हैं जो जानने योग्य है. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर के वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना तीन स्तर पर हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है- पहला, संक्रमण से ठीक होने के बाद लगभग 15 प्रतिशत मरीजों में संक्रमण के लक्षण दिखाई दिये हैं. दूसरा, उपचार के बाद लगभग 75 फीसदी लोग सामान्य महसूस नहीं करते. तीसरा, संक्रमित लोगों में कुछ माह बाद कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं देखने को मिली हैं. कई मामलों में युवा और सामान्य लोगों में भी संक्रमण से ठीक होने के बाद कई सप्ताह या महीनों तक ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं. 

रिकवरी के बाद ये लक्षण दिखें, तो हो जाएं अलर्ट

-सांस लेने में परेशानी.

-तेज बुखार.

-छाती में तेज दर्द.

-भ्रम की स्थिति.

-अत्यधिक कमजोरी.

-पाचन तंत्र संबंधी परेशानी.

-त्वचा पर रैशेज पड़ना.        

-बाल झड़ना.

-मांसपेशियों में दर्द या सिरदर्द होना.

-हृदय का तेजी से धड़कना.

-याददाश्त कमजोर होना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी या नींद में बाधा उत्पन्न होना.

बरतें ये सावधानियां : संक्रमण से ठीक होने के बाद स्वस्थ जीवनशैली का पालन करें. चेतावनी भरे संकेतों को नजरअंदाज न करें. अस्पताल से डिस्चार्ज होने के तुरंत बाद सामान्य दिनचर्या शुरू न करें. संक्रमण होने के कारण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है. जब तक मरीज का ऑक्सीजन लेवल सामान्य न हो जाये और सभी लक्षण ठीक न हो जायें, तब तक मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज न कराएं. अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद मरीज को दो सप्ताह तक घर पर ही आइसोलेशन में रखें. नियमित रूप से शरीर का ऑक्सीजन लेवल, तापमान और हृदय की धड़कनों को मॉनिटर करें. हालांकि अधिकांश लोगों में ठीक होने के बाद इतनी एंटीबॉडी बन जाती है, जिससे वे फिर संक्रमित नहीं हो पाते.

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