धूम्रपान की वजह से बढ़ती है फेफड़ों की परेशानी

सीओपीडी की पहचान करना जरूरी है. इसमें सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं और उनमें सूजन आ जाती है. अधिकतर मरीज डॉक्टर के पास बीमारी के अधिक फैल जाने के बाद पहुंचते हैं. इस समय फेफड़ों को आघात पहुंचने का खतरा अधिक रहता है, जो परेशानी का सबब बनता है.

सीओपीडी के लक्षण : लंबे समय तक खांसी-जुकाम रहना, लंबे समय तक बलगम और कफ बनना, व्यायाम एवं सीढ़ियां चढ़ते समय सांस लेने में परेशानी होना सीओपीडी के लक्षण हैं.

सीओपीडी का उपचार :रोग का निर्धारण शारीरिक परीक्षण और अन्य जांचों द्वारा होता है. इन जांचों में स्पाइरोमेट्री, रक्त या बलगम का परीक्षण, एक्स-रे और ओक्सिमेट्री इत्यादि महत्वपूर्ण हैं. धूम्रपान छोड़ना एवं धुएं वाली हवा से सांस को बचाना, सीओपीडी की किसी भी अवस्था में रोग की गंभीरता में कमी लाने का सबसे महत्वपूर्ण कदम है. इसके अलावा, वजन कम करना, नियमित व्यायाम और पौष्टिक आहार रोग को दूर करने में मदद करता हैं. डाक्टरों द्वारा जांच किये जाने के बाद निर्धारित दवाइयां जैसे की इन्हेलर्स, ब्रोन्कोडीलेटर टैबलेट्स इत्यादि लेने से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है.

सीओपीडी में योग है फायदेमंद
सीओपीडी में फेफड़े में सूजन के कारण सांस लेने तथा छोड़ने में परेशानी होती है. कुछ सावधानी व प्राणायाम से मरीज की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है. धुएं या वायु-प्रदूषण जैसी स्थितियों से बचें. इनसे फेफड़े उत्तेजित होते हैं. फेफड़ों में जमे कफ को निकालने में चेस्ट फिजियोथेरेपी उपयोगी है. सीने को झकझोरने से भी कफ ढीला पड़ जाता है और आसानी से बाहर निकल जाता है. ऐसे व्यायाम करें जिनसे सांस लेने की गति बढ़े, जैसे- हल्की रनिंग, जॉगिंग, स्ट्रेचिंग, तेज चलना आदि. सिर झुकाने या कंधों को सिकोड़ने से परहेज करें. सीओपीडी में भस्त्रिका, नेति और कुंजल भी उपयोगी है. ब्रीदिंग एक्सरसाइज सीओपीडी के रोगियों के लिए वरदान हैं. इस एक्सरसाइज के दौरान जैसे-जैसे आप सांस लेते हैं, वैसे-वैसे फेफड़ों में सांस भरती जाती है, जो बलगम को फेफड़ों से निकालने में आवश्यक होती है. पर्स्ड लिप ब्रीदिंग एक्सरसाइज अधिक देर तक चलती है और ऐसे मरीजों के लिए है, जिनके फेफड़ों में जरूरत से ज्यादा एयरस्पेस है.

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