Coronavirus : ऐसे कोरोना वायरस आपके फेफड़ों पर करता है हमला, लैब में बनाये गये मिनी लंग्स और…

दुनिया के कई देशों में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है, भारत की राजधानी दिल्ली में भी संक्रमितों की संख्या में हो रही लगातार बढोत्तरी चिंता का विषय बन चुका है. इसी बीच कोरोना के संक्रमण को लेकर एक अध्ययन सामने आया है. दरअसल कोरोना वायरस फेफड़ों पर हमला करने के लिए जाना जाता है, लेकिन पूरा हमला कैसे घटित होता है, इसे जानने के लिए वैज्ञानिकों ने लैब में फेफड़ों का मॉडल तैयार कर उसे कोरोना वायरस से संक्रमित किया.

पिछले दिनों अध्ययन ‘सेल स्टेम प्रेस’ में प्रकाशित हुए हैं. एक अध्ययन दक्षिण कोरियाई और ब्रिटिश अध्ययनकर्ताओं द्वारा, तो दूसरा अमेरिका के ड्यूक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया. दोनों अध्ययन दिखाते हैं कि वायरस फेफड़ों के एल्वियोली को नुकसान पहुंचाते हैं. एल्वियोली गुब्बारे जैसे हवा के बैग होते हैं, जो ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और कार्बन डाइ ऑक्साइड बाहर निकालते हैं. इसके नुकसान से निमोनिया और सांस लेने में जबरदस्त तकलीफ होती है, जो कोविड 19 से होनेवाली मौतों की मुख्य वजह है.

लैब में बनाये गये मिनी लंग्स: दोनों टीमों ने अपने अनुसंधान के लिए ‘मिनी लंग्स’ का इस्तेमाल किया. इन्हें बनाने के लिए उन स्टेम सेल्स का सहारा लिया गया जो फेफड़े के सबसे भीतरी हिस्सों की मरम्मत में भूमिका निभाती हैं. सबसे भीतरी हिस्से पर ही कोरोना वायरस हमला करता है. इन स्टेम सेल्स को एटी2 सेल्स कहा जाता है.

मिनी लंग्स को संक्रमित किये जाने के छह घंटे बाद कोशिकाओं ने इंटरफेरॉन पैदा करने शुरू कर दिये. ये ऐसे प्रोटीन हैं जो पड़ोसी कोशिकाओं के लिए वॉर्निंग सिगनल का काम करते हैं. 48 घंटे बाद कोशिकाओं ने वायरस से लड़ना शुरू कर दिया. और 60 घंटे बाद कुछ एल्वियोली सेल्स का विखंडन शुरू हो गया. इसका नतीजा कोशिकाओं की मौत और ऊतकों को नुकसान के रूप में देखा गया.

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