Covid 19 : सामाजिक भेदभाव को दूर करने में एएनएम धर्मशीला को मिल रही है सफ़लता

जहानाबाद : ‘’जिंदगी और मौत उपर वाले के हाथ में है. मौत को टाला नहीं जा सकता है. लेकिन मौत के डर से कर्तव्य से पीछे हटना भी कायरता है. मेरी जिम्मेदारी लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है. यदि यह जिम्मेदारी मुझे दी गयी है तो उसे मुझे निभाना ही है’’ यह कहना है एएनएम धर्मशीला देवी का. कर्तव्यन्ष्ठिा व परायणता की इस मिसाल की वजह से आज कई लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा संभव हो सका है.

जिला के मोदनगंज प्रखंड के ओकरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात एएनएम धर्मशीला देवी बताती हैं पिछले चार माह से अधिक समय से कोरोना संदिग्धों व संक्रमितों की स्क्रीनिंग के साथ बाहर से आने वाले प्रवासियों के नाम पता की इंट्री करने का काम उन्होंने बिना किसी खौफ के किया है. कोरोना महामारी की वजह से जहां लोग घरों में दुबके पड़े रहना पसंद करते हैं वे अपने घर व अस्पताल दोनों जगह अपनी जिम्मेदारियों का सफलता पूर्व निर्वाह कर रही हैं. वह कहती हैं हालात गंभीर हैं. लेकिन इस स्थिति में संक्रमण से रोकथाम को लेकर लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है. अस्पताल आने जाने वाले प्रत्येक लोगों को शारीरिक दूर रखने, मास्क लगाने व हाथ धोने आदि की जानकारी देने के साथ इसे सौ फीसदी सुनिश्चित कराने की वह हर कोशिश करती हैं.

अफवाहों को दूर करने के लिए किया काम:
धर्मशीला देवी ने बताया बहुत लोग कोरोना से जुड़े अफवाह के शिकार हैं. कई लोगों को यह भ्रम है कि टीकाकरण से संक्रमण नहीं होता. वहीं कई लोग यह मानते हैं कि गर्म पानी पीने से इस बीमारी से बचा जा सकता है. लोगों में यह भी भ्रम है कि कोरोना का असर सिर्फ बूढ़ों पर होता है. वहीं कुछ महिलाएं इसे देवी का प्रकोप कहती हैं. लेकिन इस तरह की अफवाह दूर करने के लिए लोगों से चर्चा कर इसकी सही जानकारी देती हैं. ऐसे लोगों को बताती हैं यह श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाली बीमारी है और इसकी चपेट को कोई भी आ सकता है. लोगों से मास्क लगाकर बाहर निकलने व व्यक्तिगत साफ सफाई की अपील भी करती हैं.

भेदभाव नहीं करने की देती हैं सलाह:
वह बताती हैं संक्रमितों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है. इस गंभीर परिस्थति में भी चिकित्सक व एएनएम दूसरी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन तक पहुंचाने में लगे हैं. कई बार संक्रमित या सदिग्ध लोगों सहित आशा व आंगनबाड़ी सेविकाएं भी भेदभाव का शिकार हो जाती हैं. इस भेदभाव को दूर करने के लिए अस्पताल आने जाने वालों को सही जानकारी देनी वह अपनी जिम्मेदारी समझती हैं. वह लोगों को बताती हैं कि कोरोना संदिग्ध या संक्रमित से शारीरिक दूरी रखा जानी चाहिए. उसके साथ मानसिक या सामाजिक भेदभाव सही नहीं है. एक बार स्वस्थ्य होने जाने पर वह समाज व परिवार के साथ उठ बैठ सकते हैं.

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