बस करें ये काम, लिवर रहेगा हेल्दी

क्या आप अपने लिवर को हेल्दी रखना चाहते हैं ? यदि इसका जवाब हां है तो आगे की बातें आप जरूर जानें…ऐसा इसलिए कि आजकल की दिनचर्या के कारण लिवर की बीमारी आम बात हो गई है. आइए आपको बताते हैं लिवर को हेल्दी रखने का तरीका…

एक्टिव लाइफ स्टाइल : स्वस्थ दिनचर्या का पालन करें. रात को जल्दी सोएं, सुबह जल्दी उठें, समय पर खाना खाएं. फिजिकली एक्टिव रहने के लिए रोज व्यायाम, योग, गेम्स आदि करें.

सेल्फ मेडिकेशन न करें : कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और शूगर लेवल कंट्रोल में रखें. हेपेटाइटिस ए और बी के इंजेक्शन जरूर लगवाएं. डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं न लें. फैटी लिवर से बचने के लिए एल्कोहल, ध्रूमपान का सेवन न करें.

खान-पान का रखें ध्यान : आहार में फाइबर युक्त चीजें लें, जैसे- हरी पत्तेदार सब्जियां, साबूत अनाज, चोकर युक्त आटा, दलिया, ओट. सलाद में गाजर, टमाटर, प्याज आदि ज्यादा से ज्यादा लें. अंगूर, ब्लू बेरी, सेब, नीबू, संतरा, कीनू, पपीता, एवोकैडो, आंवला ताजे फल लें.

इन चीजों से बचें : अत्यधिक गरिष्ठ, अधिक तला-भुना और मांसाहारी भोजन से परहेज करें. हाई कैलोरी और वसा युक्त जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड से बचें. नमक और मसाले न्यूनतम खाएं. शर्करा युक्त चीजें, मिष्ठान, शीतल पेय आदि कम करें.

लिक्विड डायट पर जोर : दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं. ज्यादा से ज्यादा लिक्विड डाइट लें. सुबह खाली पेट वेजिटेबल जूस लेना लाभप्रद है. सुविधानुसार पुदीना के पत्ते, नीबू, अदरक, तुलसी, नारियल पानी, खीरा, करेला, ऐलोवेरा आदि का डिटॉक्स वाटर ले सकते हैं. दिन में एक बार ग्रीन टी जरूर लें.

रेगुलर एक्सरसाइज : लिवर स्वस्थ रखने के लिए वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है. आप सुविधानुसार, रोज 30-40 मिनट व्यायाम या योग जरूर करें. इसमें ब्रिस्क वाक या जॉगिंग, एरोबिक, डांस आदि शामिल कर सकते हैं. सुबह खाली पेट प्राणायाम, भ्रामरी, अनुलोम विलोम, कपालभाति सूर्य नमस्कार, अर्ध मत्स्येंद्रासन, मलासन करना फायदेमंद हैं.

व्यक्तिगत स्वच्छता बरतें : भोजन से पहले और शौचादि के बाद साबून से हाथ जरूर धोएं. हेपेटाइटिस से बचाव के लिए असुरक्षित यौन संबंध न बनाएं. ब्लड ट्रांसफ्यूजन के समय सुनिश्चित करें कि रक्त संक्रमित न हो. लिवर संबंधी किसी भी परेशानी में तुरंत डॉक्टर से मिलें.

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, भारत में 10 प्रमुख जानलेवा रोगों में से एक लिवर रोग भी है. विडंबना है कि देश में हर साल इसके तकरीबन 10 लाख नये मामले सामने आते हैं, जिनमें से दो लाख लोग दम तोड़ देते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *