बच्चों को जंक फूड से बचाएं नहीं तो…

गया : “शिशुओं, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं व किशोरियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की जानकारी पोषण माह के दौरान दी जा रही है. इसके साथ सामुदायिक भागीदारी को सुनिश्चित कराया जा रहा है ताकि कुपोषण को दूर किया जा सके. अन्नप्राशन व गोदभराई जैसे कार्यक्रम कोविड 19 के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सभी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं. कुपोषण के कारणों और हमारे आसपास मौजूद पोषक तत्वों के इस्तेमाल पर भी जानकारी लोगों को दी गयी है.”

यह बातें जिला समेकित बाल विकास परियोजना की जिला समन्वयक सबा सुल्ताना ने सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च द्वारा कोविड 19 में पोषण और स्वास्थ्य देखभाल विषय पर आयोजित वर्चुअल संवाद के दौरान कही. उन्होंने कहा कि बेहतर पोषण के लिए किचन गार्डन के परिकल्पना को आकार देना है. गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के अभिभावकों को कुपोषण के कारणों व उसके निवारण संबंधी आवश्यक जानकारी देने के लिए प्रचार-प्रसार किया जा रहा है.

पोषण के पांच सूत्रों पर की गयी चर्चा: इस मौके पर जिला कार्यक्रम समन्वयक सुशांत कुमार ने प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना की चर्चा कर इसके मिलने वाले लाभ लेने के लिए कहा. उन्होंने बताया इस योजना के तहत गर्भवती व धात्री महिलाओं में स्वास्थ्य सुधार और नकदी प्रोत्साहन के माध्यम से  उनके पोषण को बेहतर करना है. इसके तहत लाभुक को तीन किस्त में 5000 रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाता में भेज दी जाती है. 

बच्चों को जंक फूड से बचाने की अपील: आइसीडीएस जिला परियोजना सहायक शहला नाज ने कहा कि माता पिता अपने बच्चों के पोषण पर जरूर ध्यान दें. बच्चों को जंक फूड से बचायें. जंक फूड के इस्तेमाल के प्रति भी सामुदायिक स्तर पर जागरूकता लायी जा रही है. इसके साथ गृहभ्रमण कर शिशुओं, गर्भवती महिलाओं व धात्री माताओं को उनके लिए आवश्यक पोषण वाले भोजन बनाने की भी जानकारी दी जा रही है. उन्होंने बताया 6 माह की उम्र के बाद अनुपूरक आहार नहीं मिलने व बाद के समय में आहार में पोषक तत्वों की कमी की वजह से बच्चे कुपोषित होते हैं और उम्र की तुलना में उनका शारीरिक व मानसिक विकास नहीं हो पाता है.

आईसीडीएस जिला कार्यक्रम सहायक विशाल कुमार ने पोषण माह के दौरान पोषण के पांच सूत्रों पर जानकारी दी. इनमें शिशु के जीवन के पहले 1000 दिन, डायरिया प्रबंधन, पोष्टिक आहार, एनीमिया प्रबंधन एवं  स्वच्छता आदि की जानकारी दी. यूनिसेफ से डिवीजनल कॉर्डिनेटर न्यूट्रिशन आशुतोष कुमार ने बताया कि एनीमिया प्रबंधन के लिए महिलाओं व किशोरियों को आयरन गोलियां व खानपान की जानकारी दी जा रही है.

समुदाय की पोषण की समझ बढ़ाने पर बल: वेबीनार के दौरान केयर इंडिया के जिला तकनीकी पदाधिकारी, आउटरिच एंड न्यूट्रिशन अमित कुमार ने कहा पोषण को लेकर समुदाय की समझ बढ़ाने के लिए जानकारी साझा किया जाना जरूरी है. इसके साथ ही बच्चों का वजन व लंबाई माप कर कुपोषित बच्चों को चिन्हित करना है.

यूनिसेफ से डिवीजनल कॉर्डिनेटर न्यूट्रिशन आशुतोष कुमार ने बताया कि एनीमिया प्रबंधन के लिए महिलाओं व किशोरियों को आयरन गोलियां व खानपान की जानकारी दी जा रही है.

इस वेबिनार के दौरान सीफार के अपर राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी रंजीत कुमार, राज्य डॉक्यूमेंटेशन अफसर सरिता मलिक व सभी डिवीजन के डिवीजनल कॉर्डिनेटर शामिल थे.

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