‘एक था विकास दुबे कानपुर वाला’

Vikas Dubey Encounter : कुख्‍यात अपराधी और कानुपर मुठभेड का मुख्य आरोपी विकास दुबे एनकाउंटर में मारा गया. एनकाउंटर को लेकर पुलिस ने जानकारी दी कि पुलिस ने आत्मरक्षा में विकास पर गोली चलाई थी. अपराधी को कानपुर ला रही कार पलटने के बाद विकास दुबे ने पुलिस से हथियार छीनकर भागने का प्रयास किया जिसके बाद पुलिस ने जवाबी फायर की जिसमें वह घायल हो गया. अस्पताल ले जाने के बाद विकास दुबे को मृत घोषित कर दिया गया.

कुख्यात अपराधी एवं कानपुर के बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले का मुख्य आरोपी विकास दुबे शुक्रवार सुबह कानपुर के भौती इलाके में कथित पुलिस मुठभेड़ मे मारा गया. पुलिस के अनुसार उज्जैन से कानपुर लाते समय हुए सड़क हादसे में एक पुलिस वाहन के पलटने के बाद दुबे ने भागने का प्रयास किया.

आपको बता दें कि छह दिन से फरार गैंगस्टर विकास दुबे को गुरुवार सुबह उज्जैन से गिरफ्तार किया गया था. इस अरेस्ट को गिरफ्तारी कम और विकास दुबे का सोचा-समझा सरेंडर ज्यादा बताया जा रहा था. जिस तरीके से महाकाल मंदिर से विकास दुबे की गिरफ्तारी हुई थी, वह अपने-आप में कई सवाल खड़े कर रही थी. दो जुलाई की रात आठ पुलिसकर्मियों की हत्या की वारदात को अंजाम देने वाला विकास दुबे नौ जुलाई को सुबह करीब 10 बजे उज्जैन से पकड़ा गया. यानी उसे पकड़ने में करीब 154 घंटे लग गये. और इस दौरान वह छह दिन तक चार राज्यों में घूमता रहा.

गिरफ्तारी से पहले दुबे ने मंदिर में जाने के लिए 250 रुपये का वीआइपी पास और प्रसाद खरीद, मंदिर परिसर में खड़े हो कर फोटो शूट कराया, मोबाइल से वीडियो बनाया, सीसीटीवी कैमरे में अपनी उपस्थिति दर्ज करायी, फिर वहां मौजूद गार्ड को चिल्ला कर कहा,‘मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला’. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों को अलर्ट किया गया. वीडियो फुटेज में उसने अपनी गिरफ्तारी के वक्त किसी तरह का प्रतिरोध नहीं किया.

वह उत्तर प्रदेश के नंबर प्लेट वाली जिस गाड़ी से मध्य प्रदेश पहुंचा था, उस पर हाइकोर्ट लिखा हुआ था. इसी कारण वह आसानी से राज्य की सीमा पार कर पाया. गाड़ी किसी मनोज यादव के नाम पर पंजीकृत है.

गिरफ्तारी या सोचा-समझा सरेंडर : कैसे बचता रहा

एनकाउंटर के बाद कानपुर में दो दिन रहा, कानपुर के शिवली में ही दोस्त के घर ठहरा, यूपी एसटीएफ और 40 थानों की पुलिस उसका पता नहीं लगा सकी. 

कानपुर से 92 किमी दूर एक ट्रक में सवार हो औरैया पहुंचा, सख्त नाकेबंदी के बावजूद यूपी पुलिस उसे ट्रेस नहीं कर पायी.

औरैया से 385 किमी की दूरी तय कर कार से फरीदाबाद पहुंचा, पूरे देश में कोरोना को लेकर जारी सख्ती के बावजूद वह बच गया

हरियाणा पुलिस और यूपी एसटीएफ की टीम ने फरीदाबाद के होटल में ली तलाशी, इससे पहले विकास दुबे ऑटो में बैठ वहां से निकल गया.

फरीदाबाद में वह एक रिश्तेदार के घर पर भी रहा, यहां भी पुलिस के पहुंचने से पहले वह भाग निकला.

फरीदाबाद से करीब 800 किमी दूर उज्जैन पहुंचा, इसके लिए वह या तो हरियाणा, यूपी के रास्ते मध्यप्रदेश पहुंचा होगा, या फिर हरियाणा, राजस्थान के रास्ते मध्यप्रदेश, फिर भी पुलिस को उसका पता नहीं लगा, फरीदाबाद से उज्जैन पहुंचने में लगता है 17-18 घंटे का समय

यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने भी सवाल उठाया कि विकास उज्जैन तक कैसे पहुंचा?

यह गिरफ्तारी नहीं, सोचा-समझा सरेंडर कहा जा रहा है, क्योंकि विकास को एक फूलवाला पहचानता है और बिना किसी एसटीएफ, कमांडो या एटीएस के उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है.

सुबह सात बजे महाकाल मंदिर पहुंचा विकास

वीआइपी गेट से प्रवेश करने के लिए पुलिस पोस्ट के पास से 250 रूपये की रसीद कटवायी

पास के ही एक दुकान से मंदिर में चढ़ाने के लिए प्रसाद और फूल खरीदा

मंदिर में प्रसाद और फूल बेचने वाले सुरेश ने सबसे पहले विकास दुबे को देखा

पहचान करने के लिए मंदिर परिसर में तैनात कॉन्स्टेबल घनश्याम मिश्रा को सूचित किया

घनश्याम ने पुलिस चौकी में सूचना दी, मंदिर के सुरक्षा गार्ड को बताया

सुरक्षाकर्मियों ने मंदिर के निर्गम द्वार पर विकास को पकड़ा, इस मौके पर उसकी सुरक्षाकर्मियों से हल्की झड़प भी हुई

पुलिस ने उससे उसका नाम पूछा और उसने विकास दुबे बताया, इसके बाद पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी.

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