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Corona Vaccination को अब मिलेगी और रफ्तार, मोदी सरकार ने दो नई COVID वैक्सीन और एक एंटी वायरल दवा को दी मंजूरी

Corona Vaccination : भारत की कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में दो हथियार और शामिल किये गये हैं. दरअसल कोविड की जंग को व्यापक करते हुए केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने ‘सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ (एसआईआई) के कोविड-19 रोधी वैक्सीन ‘कोवोवैक्स’ और ‘बायोलॉजिकल ई’ कम्पनी के वैक्सीन ‘कोर्बेवैक्स’ को कुछ शर्तों के साथ आपात स्थिति में उपयोग की अनुमति देने का काम किया है.

यही नहीं, कोविड-19 रोधी दवा ‘मोलनुपिराविर’ (गोली) के आपात स्थिति में नियंत्रित उपयोग को भी अनुमति प्रदान की गई है. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने सीडीएससीओ की कोविड-19 संबंधी विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) द्वारा ‘कोवोवैक्स’ और ‘कोर्बेवैक्स’ को कुछ शर्तों के साथ आपात स्थिति में उपयोग की अनुमति देने की सिफारिश किये जाने के एक दिन बाद इस बात का ऐलान किया.

साथ ही, कोविड-19 रोधी दवा ‘मोलनुपिराविर’ (गोली) के आपात स्थिति में नियंत्रित उपयोग को भी अनुमति मिल गई है. इसे वयस्क मरीजों और जिन्हें बीमारी से बहुत ज्यादा खतरा है, उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा. इस संबंध में 28 दिसंबर को मांडविया ने अपने ट्विटर वॉल पर लिखा कि मुबारक हो भारत…कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत करते हुए, केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने एक दिन में तीन स्वीकृति देने का काम किया है.

आगे उन्होंने अपने ट्विटर वॉल पर लिखा कि कोवोवैक्स, कोर्बेवैक्स वैक्सीन और दवा ‘मोलनुपिराविर’ को कुछ शर्तों के साथ आपात स्थिति में उपयोग की अनुमति दे दी है. इस मंजूरी के साथ, देश में आपात स्थिति में उपयोग होने वाले कोविड-19 रोधी वैक्सीन की संख्या बढ़कर आठ हो गई है.

आपको बता दें कि ‘सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ का ‘कोविशील्ड’, भारत बायोटेक का ‘कोवैक्सीन’, जायडस कैडिला का ‘जायकोव-डी, रूस का ‘स्पुतनिक वी’ और अमेरिका का ‘मॉडर्ना’ एवं ‘जॉनसन एंड जॉनसन’ वे अन्य छह वैक्सीन हैं, जिन्हें भारतीय दवा नियामक पहले ही आपात स्थिति में इस्तेमाल की मंजूरी देने का काम पहले ही कर चुका है.

एक अन्य ट्वीट में मांडविया ने कहा कि ‘कोर्बेवैक्स’ भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित आरबीडी प्रोटीन सब-यूनिट कोविड-19 रोधी वैक्सीन है जिसे हैदराबाद की ‘बायोलॉजिकल ई’ कम्पनी ने बनाया है. यह हैट्रिक है. यह भारत में निर्मित तीसरा टीका है. आगे उन्होंने कहा कि ‘नैनोपार्टिकल’ टीके ‘कोवोवैक्स’ का निर्माण पुणे के ‘सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ में ही किया जाएगा.

मांडविया ने कहा कि कोविड-19 रोधी दवा ‘मोलनुपिराविर’ (गोली) का आपात स्थिति में नियंत्रित उपयोग के लिए देश में 13 कम्पनियों द्वारा निर्माण किया जाएगा…इसे वयस्क मरीजों और जिन्हें बीमारी से बहुत ज्यादा खतरा है उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा.