डायबिटीज के शुरुआती लक्षण को जानें , आपके शरीर में हैं ये लक्षण तो हो जाएं सावधान

वर्तमान दौर में खान-पान की गलत आदतों और खराब जीवनशैली की वजह से लोगों में डायबिटीज की समस्या आम हो गयी है. डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जो भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले सिस्टम को प्रभावित करती है. इस स्थिति में इंसुलिन की कमी के कारण शरीर में ब्लड शुगर का लेवल बढ़ जाता है, जिससे कई शारीरिक परेशानियां बढ़नी शुरू हो जाती हैं. डायबिटीज का कोई खास इलाज नहीं है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली को अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. कुछ ऐसे संकेत हैं, जिन्हें पहचानकर डायबिटीज को समय पर नियंत्रित किया जा सकता है.

हीं भूख तो नहीं बढ़ रही
डायबिटीज की शुरुआत होने पर व्यक्ति को बार-बार भूख लगने का एहसास होता है. इस दौरान शरीर की कोशिकाओं में ग्लूकोज की कमी होने लगती है, इसलिए शरीर का एनर्जी लेवल कम हो जाता है. इसकी वजह से काफी ज्यादा भूख लगती है.

जन तो नहीं घट रहा
डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों में से एक है वजन का तेजी से घटना. अगर आपका वजन बिना किसी कारण से तेजी से घट रहा है, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें. जब शरीर को ऊर्जा के लिए पर्याप्त ग्लूकोज नहीं मिलता है, तो वह अपनी ऊर्जा की मांग को अन्य तरीकों से पूरा करने की कोशिश करता है, जिससे वजन पर असर पड़ता है.

आंखों से धुंधला तो नहीं दिख रहा
जब ब्लड शुगर की मात्रा हद से ज्यादा बढ़ जाती है, तो इसका असर हमारे शरीर पर पड़ने लग जाता है. इस दौरान सबसे पहला असर हमारी आंखों पर पड़ता है. आंखों से धुंधला दिखने लगता है. ज्यादा रक्त शर्करा होने से आंखों की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है, इसे रेटिनोपैथी कहा जाता है.

क्कर आना
शरीर खाने और ग्लूकोज का पूरी तरह से उपयोग नहीं कर पाता है, इसलिए आपके मूड स्विंग होते रहते है. आपको कभी बहुत खुशी का अनुभव होता है, तो कभी आपका मन किसी छोटी-सी बात पर भी रोने का करने लग जाता है.

हाथ-पैर में सूजन या सुन्न होना
डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों में से एक है कि हाथ-पैरों में सूजन. इसके अलावा कई लोगों के हाथ में सुन्न भी हो जाते हैं. जैसे, लंबे समय तक बैठकर खड़े होने पर पैरों में झुनझुनी होने लगती है.

घाव भरने में देरी
डायबिटीज का एक अन्य लक्षण घाव भरने में देरी है. डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति को चोट लगने पर जख्म को ठीक होने में काफी समय लगता है. घाव भरने की गति धीमी होगी, तो इससे संक्रमण का भी खतरा बढ़ सकता है.