महाराज, नाराज और शिवराज! क्या होगा मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार का

मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार क्या अपना कार्यकाल पूरा करेगी या वह भी कमलनाथ सरकार की तरह चारो खाने चित होगी. यह सवाल सबके मन में पिछले दिनों से चल रहा है. दरअसल कैबिनेट का विस्तार होने के बाद विभागों का बंटवारा शिवराज के लिए सिरदर्द बनता दिख रहा है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ी रही है.

मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में इसे लेकर कई तरह की बातें चल रही है. भाजपा के अंदर, और सिंधिया खेमे से विरोध के दबे स्वर उठ रहे हैं. इन सबके बीच भाजपा के पूर्व नेता और कांग्रेस के वर्तमान नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने तंज कसा है. उन्होंने ट्वीट किया कि मध्य प्रदेश में भाजपा तीन खेमो में बंट गयी….. 1.महाराज, 2.नाराज ,और 3.शिवराज. मध्यप्रदेश के वर्तमान राजनीतिक हालात इससे अलग इशारा नहीं कर रहे हैं…..

असल में भाजपा को डर यह भी है कि विभागों के बंटवारे के फैसले से कोई बीजेपी या सिंधिया समर्थक नाराज़ हुआ तो उसका खामियाजा उप चुनाव में भुगतना पड़ सकता है. धार से बीजेपी की सीनियर विधायक नीना वर्मा को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है. पूर्व मंत्री रामपाल सिंह और सुरेंद्र पटवा को जगह नहीं मिली.

इसकी नाराजगी दोनों नेताओं ने पार्टी को जताई है. देवास जिले के हाटपिपलिया सीट से बीजेपी की विधायक गायत्री राजे पवार को मंत्री नहीं बनाए जाने पर कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन कर गुस्सा जाहिर किया है. उज्जैन से बीजेपी के विधायक और पूर्व मंत्री पारस जैन को मंत्री नहीं बनाए जाने पर नाराजगी है.

पारस जैन ने मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर विनय सहस्त्रबुद्धे से मुलाकात कर अपनी नाराजगी को बयां किया है. यशपाल सिंह सिसोदिया नाराज बताए जा रहे हैं. उनके समर्थकों ने सिसोदिया को मंत्री नहीं बनाए जाने पर विरोध प्रदर्शन किया है. भाजपा नेता उमा भारती ने भी ‘सैद्धांतिक असहमति’ का इजहार किया है.

प्रदेश के सियासी जानकारों की मानें तो शिवराज की सरकार में सिंधिया ज्यादा मजबूत स्थिति में हैं. सिंधिया खेमे के कुल 12 विधायक शिवराज सरकार में मंत्री हैं. इसमें सिंधिया के समर्थक 9 विधायक हैं और कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए तीन विधायक हैं.

सूत्रों के मुताबिक कबर यह आ रही है कि सिंधिया आम लोगों से जुड़े विभागों को अपने समर्थकों को देने की मांग कर रहे हैं. जिसके कारण शिवराज के सामने यह बड़ी चुनौती है.क्योंकि शिवराज सिंह भी ऐसे ही विभागों को अपने पास रखना चाहते हैं.

शिवराज सिंह चौहान ने अकेले चार बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाया है. प्रदेश की सत्ता में चार बार मुख्यमंत्री का पद अब तक किसी के खाते में नहीं गया है. 13 साल तक सत्ता संभालने और अब चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सारे रिकॉर्ड शिवराज सिंह चौहान के नाम पर दर्ज हो गए हैं. पर इन सबके बावजूद मध्यप्रदेश के ताजा सियासी हालात तो यही बता रहे हैं कि शिवराज किसकी नाराजगी दूर करें.

असल में भाजपा को डर यह भी है कि विभागों के बंटवारे के फैसले से कोई बीजेपी या सिंधिया समर्थक नाराज़ हुआ तो उसका खामियाजा उप चुनाव में भुगतना पड़ सकता है. धार से बीजेपी की सीनियर विधायक नीना वर्मा को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है. पूर्व मंत्री रामपाल सिंह और सुरेंद्र पटवा को जगह नहीं मिली.

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