Saturday, April 13, 2024
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मध्य प्रदेश चुनाव : ज्योतिरादित्य सिंधिया को झटका, ‘1200 गाड़ियों के काफ़िले’ के साथ कांग्रेस में शामिल हुए समंदर पटेल

मध्य प्रदेश में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले कांग्रेस मजबूती के साथ बीजेपी का मुकाबला करने के लिए खड़ी है. इस क्रम में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बीजेपी में शामिल होकर कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को गिराने वाले विधायक समंदर पटेल की घर वापसी हुई है. समंदर पटेल ने पार्टी में वापसी करते हुए कहा कि उन्हें बीजेपी में “घुटन” हो रही थी. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो अपने विधानसभा क्षेत्र जावद से राजधानी भोपाल में बीजेपी के दफ़्तर में इस्तीफ़ा देने के लिए ‘1200 गाड़ियों के काफ़िले’ के साथ पहुंचे थे. रिपोर्ट के मुताबिक़ पिछले तीन महीनों में तीन सिंधिया समर्थक इसी तरह शक्ति प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस का दामन थामते नजर आ चुके हैं.

जानें कौन हैं समंदर पटेल
आपको बता दें कि समंदर पटेल इंदौर के रहने वाले हैं. वे लिम्बोदी ग्राम पंचायत से चार बार सरपंच रह चुके हैं. वे मालवा-निमांड़ में ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी बताये जाते हैं. समंदर पटेल नीमच जिले की जावद विधानसभा सीट से टिकट मांग रहे थे. 2018 में भी वो कांग्रेस से जावद विधानसभा सीट से टिकट मांगते नजर आये थे लेकिन कांग्रेस ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया था. इसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ा था.

जावद विधानसभा सीट की जंग
समंदर पटेल के जावद से निर्दलीय चुनाव लड़ने से कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा था. इस साल कांग्रेस के राजकुमार अहीर चुनाव हार गए थे. जावद विधानसभा सीट से बीजेपी के दिग्गज नेता ओमप्रकाश सकलेचा चुनावी समर में उतरते हैं. सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद समंदर पटेल भी बीजेपी में शामिल हो गए थे. वो फिर से जावद सीट के लिए दावेदारी पेश कर रहे थे, लेकिन सूत्रों का कहना है कि बीजेपी ने जावद से उन्हें टिकट देने से माना कर दिया था जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की.

गोहद से टिकट की दावेदारी
उल्लेखनीय है कि बीजेपी ने गत गुरुवार को अपनी पहली लिस्ट जारी की. इस लिस्ट में सिंधिया समर्थक नेता रणवीर सिंह जाटव को टिकट नहीं दिया गया है. गोहद से टिकट की दावेदारी कर रहे जाटव की जगह बीजेपी ने लाल सिंह आर्य को बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया. 14 जून की बात करें तो इस दिन शिवपुरी से बीजेपी नेता बैजनाथ सिंह यादव ने सिंधिया से रिश्ता तोड़ दिया था और 700 कारों की रैली लेकर कांग्रेस में शामिल हुए थे. वहीं 26 जून को शिवपुरी के पूर्व उपाध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता ने भी इसी तरह कार रैली करते हुए कांग्रेस का दामन थाम लिया था.