जेब होगी ज्‍यादा ढीली! भारत में महंगे हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल

रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों की बढ़ती मांग के बीच तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल से अधिक का उछाल आया. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों के 13 वर्ष के रिकॉर्ड स्तर 140 डॉलर प्रति पर पहुंचने के बावजूद ईंधन की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं हुई है. अब पेट्रोलियम कंपनियां अपने घाटे की भरपायी करने के लिए तैयार है. उद्योग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि घाटे को कम करने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की जरूरत है.

ब्रेंट कच्चा तेल सोमवार तड़के कुछ समय के लिए 10 डॉलर से बढ़कर लगभग 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. इसके लिए रूस के खिलाफ कठोर प्रतिबंधों के बढ़ते आह्वान के बीच यूक्रेन में संघर्ष के गहराने को जिम्मेदार बताया जा रहा है. इस बीच, लीबिया की राष्ट्रीय तेल कंपनी की ओर से कहा गया है कि एक सशस्त्र समूह ने दो महत्वपूर्ण तेल क्षेत्रों को बंद कर दिया था, जिसके बाद तेल की कीमतें बढ़ती नजर आ रहीं हैं.रूस और यूक्रेन के आपसी सैन्य टकराव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ब्रेंट क्रूड के दाम जुलाई 2008 के बाद अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंच चुके हैं.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हो रही भारी बढ़ोतरी की वजह से भारत में पेट्रोल-डीजल के साथ उपभोक्ता वस्तुओं के दामों में भी बढ़ोतरी होने की आशंका व्‍यक्‍त की जा रही है. हालांकि, भारत में पिछले साल की दिवाली के समय से पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी नहीं की गई है, लेकिन इसके दामों में बढ़ोतरी की आशंका इसलिए व्‍यक्‍त की जा रही है क्‍योंकि 10 मार्च को पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आ जाएंगे. ऐसा मानना है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की वजह से पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी नहीं की गई है.