Saturday, January 17, 2026
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भगवान उदास हैं

भक्तों में भक्ति का खुमार है, पर भगवान उदास है.!
मंदिर की ओट पर बैठे गरीब को, भक्तों से आस है. !!

मजहब के इस कोहराम में, बेचारा भगवान परेशान है!
हिंदू-मुस्लिम की फ़साद में, बेचारा इंसान हैरान है!!

मंदिर-मस्जिद की लड़ाई में, भगवान फँस गए है.!
मजहब की खींची दीवार में, जहीन पीस गया है.!!

दंगे-फ़साद के जख्म से , भगवान की आंखे नम है !
भरोसे पर पड़ती दरार से, इंसानियत गुमसुम है!!

टोपी-तिलक की बेवजह बहस से, भगवान शर्मिंदा है!
धर्म को कारोबार बनाने का, चल रहा कैसा धंधा है ?!!

इंसानियत ही असली मजहब है, भगवान यही कहते !
धर्म पर खून बहाने वाले, ये सब कहां समाझते हैं ?!!

“शिवपूजन”