Navratri 2020 महाष्टमी : महागौरी…मां दुर्गा का आठवां स्वरूप…ऐसे करें मां की पूजा पूरी होगी हर मनोकामना

Navratri 2020…वैसे तो पूरा शारदीय नवरात्र ही भक्तों के लिए मां की साधना कर उनकी असीम अनुकंपा पाने का अवसर प्रदान करता है, लेकिन इसमें भी महाष्टमी की तिथि सबसे महत्वपूर्ण बताई गई है, क्योंकि इस दिन करूणामयी मां महागौरी को भक्त प्रसन्न करने में जुटते हैं, जो सहज अपने आशीर्वाद से सबकी झोली भर देती हैं. इस तिथि की बात करें तो यह शनिवार को है. इसी दिन नवमी की पूजा भी होनी है. इस कोरोना काल में हमें यथासंभव पूजा में संयम बरतने की जरूरत है, हर अहं भाव त्याग कर पूरी श्रद्धा के साथ मां महिषासुर मर्दिनी का वंदन करें कि महामारी के संकट से उबरने की मां हमें शक्ति प्रदान करें.

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

महागौरी….यह मां दुर्गा का आठवां स्वरूप हैं. दुर्गापूजा के आठवें दिन इन्हीं की पूजा-उपासना का विधान शास्त्र में है. इनकी शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है. इनकी उपासना से भक्तों के सभी कल्मष धुल जाते हैं, पूर्वसंचित पाप भी विनष्ट होते हैं. भविष्य में पाप-संताप, दैन्य-दुःख उसके पास कभी नहीं जाते. वह सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है.

मां महागौरी का ध्यान, स्मरण, पूजन-आराधना भक्तों के लिए सर्वविध कल्याणकारी होता है. इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति भक्तों को होती है. हमें मन को अनन्य भाव से एकनिष्ठ कर सदैव इनके ही पादारविन्दों का ध्यान करने की आवश्यकता है.

ऐसी मान्यता है कि महागौरी गौर वर्ण की हैं जिनके तेज से संपूर्ण सृष्टि प्रकाशमान है. इनकी चार भुजाएं हैं. वाहन वृषभ है. इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे दाहिने हाथ में त्रिशूल है. ऊपरवाले बायें हाथ में डमरू और नीचे के बायें हाथ में वर-मुद्रा धारण हैं. इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है. इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गयी है- ‘अष्टवर्षा भवेद् गौरी।’ इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं, इसलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा भी कहा जाता है.

कथानुसार, दुर्गा सप्तशती में शुभ-निशुम्भ से पराजित होकर गंगा के तट पर जिस देवी की प्रार्थना देवतागण कर रहे थे, वह महागौरी ही हैं. देवी गौरी के अंश से ही कौशिकी का जन्म हुआ, जिसने शुम्भ-निशुम्भ के प्रकोप से देवताओं को मुक्त कराया. यह देवी गौरी शिव की पत्नी हैं, यही शिवा और शाम्भवी के नाम से पूजी जाती हैं. अष्टमी पूजन से तमाम दुख दूर होते हैं और सुखों की प्राप्ति होती है. महागौरी भक्तों का कष्ट अवश्य ही दूर करती हैं. इनकी उपासना से आर्तजनों के असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं. अतः इनके चरणों की शरण पाने के लिए हमें सर्वविध प्रयत्न करने चाहिए. अष्टमी तिथि साधना-उपासना का महापर्व है.

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