Saturday, February 24, 2024
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अल्जाइमर के ये हैं लक्षण, कहीं आपमें भी तो विकसित नहीं हो रहा यह

वर्तमान जीवन की बढ़ती आपाधापी में अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसे शब्दों से ज्यादातर लोग परिचित हो चुके हैं. कई लोग इन दोनों को एक मान लेते हैं, जबकि डिमेंशिया या स्मृति लोप सामान्य रूप से मानसिक क्षमता की निरंतर होती कमी को कहते हैं, जो कि आगे चल कर अल्जाइमर नामक बीमारी में तब्दील हो सकती है. इस बीमारी में ब्रेन टिश्यू धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं, जिसकी वजह से मस्तिष्क की क्रियाएं शिथिल पड़ने लगती हैं और व्यक्ति धीरे-धीरे सब कुछ भूलने लगता है.

इस बीमारी का सबसे शुरुआती लक्षण तब देखने को मिलते हैं, जब व्यक्ति किसी नयी चीज को सीखने में परेशानी महसूस करता है. इसके अलावा बढ़ती उम्र, पारिवारिक इतिहास, डाउन सिंड्रोम, इम्यून डिसऑर्डर, किसी तरह की ब्रेन इंज्यूरी आदि कारणों से भी डिमेंशिया के लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं. हालांकि इन कारकों पर व्यक्ति का कोई जोर नहीं है. इनके अलावा भी कई अन्य ऐसे कारक हैं, जिन पर ध्यान देकर हम डिमेंशिया के लक्षणों से अपना बचाव कर सकते हैं.

खान-पान और व्यायाम : कई अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि दैनिक जीवन के खान-पान को सुधार कर हम अपनी याद्दाश्त को क्षीण होने से बचा सकते हैं. अपने भोजन में साबुत अनाज, बीज, हरी सब्जियों और सूखे मेवों को शामिल करें. रोम यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में नियमित शारीरिक एवं मानसिक व्यायाम को भी जरूरी माना गया है.

स्मोकिंग व अल्कोहल सेवन: स्मोकिंग करने से न सिर्फ व्यक्ति की स्मरण शक्ति कुप्रभावित होती है, बल्कि वह रक्त वाहिका संबंधी अन्य बीमारियों से भी ग्रस्त हो जाता है. इसके अलावा, ब्रिट्रेन में हुए एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग अपने जवन के मध्य में प्रति सप्ताह 14 यूनिट से भी कम अल्कोहल का सेवन करने से आप डिमेंशिया से बचे रहते हैं.

मोटापा कमजोर बनाता है आपकी स्मरण शक्ति को: जिन लोगों का बॉडी-मास इंडेक्स अधिक है या कहें कि जिन लोगों के शरीर का वजन उनकी उम्र तथा लंबाई की तुलना में अधिक है, उनमें सामान्य शारीरिक वजन वाले लोगों की तुलना में डिमेंशिया के लक्षण पैदा होने की संभावना साढ़े तीन गुणा अधिक होती है. AlzDiscovery.org. पर प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों की तोंद निकली होती है, उनके शरीर में जमा वसा से ऐसे हॉर्मोन तथा रसायनों का निर्माण होता है, जो शरीर में जलन और इंसुलिन के प्रति अवरोध पैदा करते हैं. इससे मस्तिष्क की क्रियाएं भी कुप्रभावित होती हैं.

कार्डियोवास्कुलर कारक : हाइपर टेंशन तथा हाइ ब्लड प्रेशर डिमेंशिया सहित अन्य संज्ञानात्मक क्रियाओं की क्षति का एक बहुत बड़ा कारण है. हाइ ब्लड प्रेशर या हाइ कोलेस्ट्रोल के कारण आर्टरी वॉल के इर्द-गिर्द वसा जमा हो जाता है, जिससे मोटापा बढ़ता है. अनेक अध्ययनों में यह पता चला है कि बढ़ती उम्र तथा ब्लड प्रेशर का आपस में गहरा संबंध है.

प्रदूषित वातावरण : हमारी याद्दाश्त का एक बड़ा हिस्सा हमारी रोजमर्रा के क्रियाकलापों, खान-पान और आसपास के वातावरण पर निर्भर करता है. साफ एवं स्वच्छ वातावरण मन को सुकून देता है, वहीं धूल, गंदगी, शोर-शराबा आदि की वजह से हमारी शारीरिक तथा मानसिक क्रियाकलाप प्रभावित होते हैं, जो व्यक्ति की याद्दाश्त कम करते हैं.