India China Face Off : छह और चोटियों पर भारत का कब्जा, बौखला गया है चीन

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा गतिरोध जारी है. इसी बीच एक बार फिर से दोनों पक्षों में बातचीत होगी. दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की वार्ता 21 सितंबर को एलएसी के मोल्डो में होगी. इससे पहले सभी वार्ताओं में भारत-चीन तनाव को कम करने पर बात करते आये हैं, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिल सकी है. सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत और चीन के बीच सोमवार को कोर कमांडर स्तर की वार्ता पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के चीन वाले हिस्से मोल्डो में होगी. इससे पहले दोनों पक्षों में पांच बार कोर कमांडर स्तर की वार्ताएं हो चुकी हैं और सोमवार को छठे दौर की वार्ता होगी.

पीएलए बौखलाहट में :पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना से मात खाने के बाद चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) बौखलाहट में है. दोनों देशों के बीच अगले दौर की सैन्य बातचीत नहीं हो सकी है क्योंकि चीन ने तारीख तय नहीं की है. उसकी तिलमिलाहट की वजह यह है कि पिछले तीन हफ्तों में सेना ने एलएसी पर छह नयी ऊंचाइयों तक पहुंच बना ली है. मगर हिल, गुरुंग हिल, रेचिन ला, रेजांग ला, मोखपरी और फिंगर-4 के पास की ऊंचाइयों पर हमारे जवान मौजूद हैं. इन पहाड़ी इलाकों तक चीनी सेना भी पहुंचना चाहती थी मगर भारत ने चतुराई दिखायी. 29 अगस्त और सितंबर के दूसरे हफ्ते के बीच, सेना के जवानों ने बिना नजर में आये इन छह प्रमुख हिल फीचर्स को अपने कंट्रोल में कर लिया. सूत्रों ने बताया कि ये जगहें खाली पड़ी थीं और चीनी सैनिकों के वहां पहुंचने से पहले ही भारतीय जवानों ने रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली. सूत्रों ने साफ किया कि ब्लैक टॉप और हेलमेट टॉप एलएएसी के उस पार हैं.

पीएलए ने सैन्य थिएटर कमांडों को जुटाया: गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच संघर्ष के बाद चीन की पीएलए ने पांच में से चार सैन्य थिएटर कमांडों को जुटा लिया है. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्वी चीन सागर, येलो सी से दक्षिण चीन सागर में लाइव फायरिंग ड्रिल और सैन्य अभ्यास किये गये. ऐसा माना जा रहा है कि चीन ने अपने नागरिकों का ध्यान लद्दाख से हटाने के लिए ये पहल किये हैं. निक्केई एशियन रिव्यू की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीएलए ने अपने दक्षिणी थिएटर कमांड को जुटाया है, जो दक्षिण चीन सागर, उत्तरी थिएटर कमान, जो विदेशी कोरियाई प्रायद्वीप और पूर्वी थिएटर कमान की देखरेख करता है, जो कट्टर प्रतिद्वंद्वी जापान और ताइवान की देखरेख करता है.

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