Saturday, April 13, 2024
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Basant Panchami Shubh Muhurat 2022 : जानें सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र

Basant Panchami Shubh Muhurt : इस साल सरस्वती पूजा के दिन बहुत से शुभ योग बनते नजर आ रहे हैं जो विद्यार्थियों, साधकों, भक्तों और ज्ञान चाहने वालों के लिए बहुत ही शुभ बताया जा रहा है. इस दिन सिद्ध नाम शुभ योग है जो देवी सरस्वती के उपासकों को सिद्धि और मनोवांछित फल प्रदान करता है. यही नहीं सरस्वती पूजा के दिन रवि नामक योग भी इस बार बन रहा है, जो सभी अशुभ योगों के प्रभाव को दूर करने वाला बताया जा रहा है.

इन सबके साथ ही सरस्वती पूजा के दिन एक और अच्छी बात इस बार यह होगी कि बसंत पंचमी के एक दिन पहले बुद्धि कारक बुध ग्रह अपने मार्ग में होगा. इसके साथ ही शुभ बुद्धादित्य योग भी प्रभाव में रहेगा. आइए आपको बताते हैं मां सरस्वती की पूजा विधि, मंत्र, वंदना….

रस्वती पूजा के दिन न करें ये काम
-सरस्वती पूजा के दिन अपने मुख से गलती से भी अपशब्द न निकालें.
-इस दिन अध्ययन सामग्री, गायन, वादन सामग्री का अपमान कतई नहीं करें.
-पेड़-पौधों को न काटें न ही हानि पहुंचाने का काम करें.
-इस दिन स्नान, पूजा के बाद ही भोजन ग्रहण करें.
-सरस्वती पूजा के दिन काले, सादे कपड़े न पहनें रंग-बिरंगे या पीले कपड़े धारण करें.
-सरस्वती पूजा के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें.
-बसंत पंचमी के दिन पितृ तर्पण करना शुभ होता है.
-इस दिन मांस-मदिरा के सेवन नहीं करें.
-किसी के साथ झगड़ा नहीं करें.

-सरस्वती पूजा शुभ मुहूर्त
पंचमी तिथि प्रारंभ- 5 फरवरी तड़के 3 बजकर 48 मिनट से शुरू हो रहा है.
पंचमी तिथि समाप्त- 6 फरवरी तड़के 3 बजकर 46 मिनट तक है
पूजा का शुभ मुहूर्त – 05 फरवरी प्रात:काल- 07:07 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक इस बार रहेगा.

पूजा विधि
-मां सरस्वती की प्रतिमा लाएं और उन्हें पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें.
-अब देवी सरस्वती को रोली, चंदन, हल्दी, केसर, चंदन, पीले या सफेद रंग के पुष्प, पीली मिठाई और अक्षत चढ़ाएं.
-अब पूजा के स्थान पर वाद्य यंत्र और अपनी नई किताबें, पेंसिल, पेन चढ़ाएं.
-मां सरस्वती की वंदना का पाठ करें.
-हवन करें और आरती कर पूजा समाप्त करें.

सरस्वती मंत्र
ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।। कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्। वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।। रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्। सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च ।।

सरस्वती वंदना
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌। हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌ वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥२॥